Hindi Poem
यादों की नदी
कोई हक नहीं मेरा इन कहानियों पर, इन यादों पर। मैं तो बस उन्हें बहते देखना चाहता हूँ।
- यादें
- आँखें
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- नदी
- रूह
- मन
Poems
कोई हक नहीं मेरा इन कहानियों पर, इन यादों पर। मैं तो बस उन्हें बहते देखना चाहता हूँ।
ख़्वाबों से अठखेलियाँ करती हुई आँखें, बाज़ारों में अपना मोल खोजती आँखें।
चमक, अँधेरे और खामोशी के बीच सुनाई देती एक छोटी कविता।
मसूरी की भीड़ में चलते चलते।
तंग गलियों, अनबन और अधूरे घर के बीच एक-दूसरे को समझने की छोटी-सी मगर मुश्किल चाह।
अनजाने शहर की चकाचौंध में, अपने हिस्से का आसमान और खोया हुआ घोंसला खोजता एक सपना।
दया और आत्मग्लानि के बीच ठहर गई एक अजीब-सी उलझन।