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Poem Hindi

आँखें

ख़्वाबों से अठखेलियाँ करती हुई आँखें, बाज़ारों में अपना मोल खोजती आँखें।

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ख़्वाबों से अठखेलियाँ करती हुई आँखें, बाज़ारों में अपना मोल खोजती आँखें।

आँखें जो बंद होकर भी बोलती हैं, आँखें जो मेरे मन को टटोलती हैं।

आँखें बंद करूँ तो दिखें तेरी आँखें, आँखें खोलूँ तो ढूँढ़ें तुझे आँखें।