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Poem Hindi

यादों की नदी

कोई हक नहीं मेरा इन कहानियों पर, इन यादों पर। मैं तो बस उन्हें बहते देखना चाहता हूँ।

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  • नदी
  • रूह
  • मन

यूँ ही बैठे रहो मेरे सामने…

देखने दो अपनी आँखें।
मुझे तुम्हारी कहानियाँ सुननी हैं।

वो जो यादों की नदी
बहती है उन आँखों से…

किनारे बैठकर
बस मुझे देखनी है।

कोई हक नहीं मेरा
इन कहानियों पर,
इन यादों पर।

मैं तो बस
उन्हें सुनना चाहता हूँ…

उन्हें बहते देखना चाहता हूँ।

और जब किसी याद पर
तुम मुस्करा उठोगे…

मैं फिर
तुम्हारी आँखों में देखूँगा…

और उस बहती हुई नदी में
अपनी रूह भिगो लूँगा।