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Poem Hindi

मैले-कुचैले कपड़े

दया और आत्मग्लानि के बीच ठहर गई एक अजीब-सी उलझन।

  • आँखों की चमक
  • उलझन
  • गरीबी
  • आत्मग्लानि
  • मानवता

मैले-कुचैले कपड़े उनके, आँखों में लेकिन चमक अजीब। तरस करूँ या शर्म करूँ खुद पर, समझ न आए—उलझन अजीब।