Hindi Poem
आँखें
ख़्वाबों से अठखेलियाँ करती हुई आँखें, बाज़ारों में अपना मोल खोजती आँखें।
- आँखें
- ख़्वाब
- मोल
- प्रेम
- मन
रास्ते से प्रेरित एक डायरी
शायद परिवर्तन किसी पहाड़ की चोटी पर नहीं मिलता, बल्कि उन परिस्थितियों को स्वीकार करने में मिलता है जो हमारे मन के अनुसार नहीं होतीं।
गंगा के किनारे बैठकर मन में आया कि वह कितनी कहानियाँ सुनती होगी, और शायद उन्हें बादल बनाकर फिर दुनिया में लौटा देती होगी।